सोमवार, 14 मई 2012

कुछ समझाइशों के बादल ...!!!















कुछ विरोधी स्‍वर
मन में अपनी बातों की
पकड़ मजबूत रखते हैं
कोई कितना भी 
सच कहे
उसे यह ना मानने की 
जब शपथ ले लेते हैं
तो फिर 
नहीं मानते हैं ... 

कुछ समझाइशों के बादल
आंखों में तैरते जरूर हैं
लेकिन उन्‍हें 
बरसने के लिए
वक्‍त पर ही निर्भर
कर दिया जाता है ... 

एक शोर है आस-पास 
पर गुमनाम सा वह
कौन है जिसको
पुकार रहा है यह शोर  ...

उधार की जिन्‍दगी से अच्‍छा है
निज़ता का बोध
एक मील का पत्‍थर

शनिवार, 21 अप्रैल 2012

यह मन भी ...





















किस किस से पूछोगे
किस किस को समझोगे
यूँ तो शीर्ष पर
कोई न कोई होता है
और जिन्‍दगी में उसका ही
अनुसरण करते हुए
आगे बढ़ना होता है ...
मानव तन में आत्‍मा का
ओहदा सबसे परम विश्‍वासी
माना जाता है
पर मन ने अपना कब्‍जा वहां भी
साधिकार जमा रखा है
आत्‍मा कुछ कहे तो
अपना मन सबसे आगे
बुद्धि कुछ कहने को आगे होती तो भी
मन को अनसुना करना है
यह मन भी न
अपनी मनमानी के लिए
आजकल चर्चा में है :)
पल में खफ़ा तो  पल में खुश
इसकी मानो तो ठीक वर्ना हो गया उदास (:
लेकिन हम सही मार्ग पर हैं या नहीं
इसके लिए बुद्धि को इसकी लगाम
अपने हाथों में रखनी होगी
ताकि आत्‍मा हमें
नेक राह पे ले जा सके ... !!!

शुक्रवार, 23 मार्च 2012

उसकी हंसी में खिलखिलाकर ...
















उपकार के प्रति तुम
कृतज्ञता का भाव रखते हो मन में जब
तो क्‍या करते हो बदले में
उसके लिए विनम्र हो जाते हो
या नतमस्‍तक हो
उसका अनुसरण करने लगते हो
उसकी हर खुशी का
ख्‍याल रख उसके आगे-पीछे हो
उसकी ढाल बन जाते हो 
सोचो क्‍या उसने तुम पर
इसलिए उपकार किया था
वो तो मात्र माध्‍यम था
तुम्‍हारे लिए...
जो वह निष्‍कपट हो बन गया 
बस यह सोचकर
कभी तुम्‍हें भी अवसर मिले
तो किसी अंजान शख्‍़स पर
उपकार कर देना ...
किसी मासूम बच्‍चे के 
सिर को सहलाकर
उसकी  हंसी में खिलखिलाकर
शामिल हो जाना ... 


मंगलवार, 13 मार्च 2012

बजट चक्र और आम जन ...


हम आम जन सामान्‍य सी भाषा में  आय और व्‍यय की सूची को बजट कहते हैं, बजट किसी देश, संस्‍था, व्‍यक्तिगत अथवा किसी परिवार का भी हो सकता है, यह भविष्‍य में किये जाने वाले व्‍यय का हिसाब है जिसे हम वर्तमान में बनाते हैं, हर साल की तरह इस साल भी मार्च माह में बजट पेश होने जा रहा है ... केन्‍द्रीय बजट भारतीय राज्‍य के राष्‍ट्रीय जीवन में अपनी भूमिका और भागीदारी को ठोस रूप देता हुआ साल दर साल बदलता हुआ यह एक विचारणीय मुद्दा है बजट में सरकार की आर्थिक नीतियों का स्‍पष्‍ट संकेत मिलता है, इसके बनने की प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल होने के साथ-साथ अति गोपनीय भी होती है बजट भाषण पूरा होने के सात दिन पहले से बजट से जुड़े सभी अधिकारी और कर्मचारियों का बाहरी दुनिया से कोई सम्‍पर्क नहीं रहता है ... संसद में बजट पेश किए जाने से 10 मिनट पहले कैबिनेट को इसका संक्षिप्‍त रूप दिखाया जाता है।
अब सवाल यहां आम आदमी के बजट का या परिवार का आता है जहां घर खर्च की जरूरी चीजों के साथ बढती मंहगाई के बीच एक वर्ष तो दूर की बात एक माह का बजट भी अव्‍यवस्थित हो उठता है क्‍योंकि यहां दैनिक उपयोग में आने वाली वस्‍तुओं के दामों में जिस तरह से बढ़ोत्‍तरी होती है वहां किस खर्च को कितना और किस तरह सुनिश्चित किया जाए यह एक बड़ा सवाल बन जाता है ...केन्‍द्रीय बजट जहां अपनी जटिलताओं के चलते गोनपीय ढंग से बनाया जाता है उसमें आज भी वही पुराना ढर्रा कायम है जिसमें आम जन के उपयोग में आने वाली वस्‍तुओं को अनदेखा कर दिया जाता है जब कभी भी हुआ रसोई गैस एवं पेट्रोल के दामों में वृद्धि कर दी जाती है इस पर ध्‍यान देने के साथ सकारात्‍मक बदलाव की आवश्‍यकता भी है जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।

यहां तो उद्योंगों का भार भी आम जनता के माथे पर मढ़ दिया जाता है अब बात हो रही है बिजली पर वैट लगाने की ... बिजली पर वैट लगाने से आम लोगों पर दुहरी मार पड़ेगी उसे अपने घर के बिल से तो झटका लगेगा ही ... उद्योग-धंधों पर पर बढ़े बोझ का भार भी उसे उठाना पड़ेगा आम लोगों के उपयोग की चीजों के दाम बढ़ेंगे जिन्‍हें मंहगे दामों पर खरीदना होगा इस एक फैसले से सभी पर असर पड़ेगा जब उद्योग अपने उत्‍पाद मंहगे करेंगे तो प्रतिस्‍पर्धा में पीछे होंगे बाजार में पहले से ही सस्‍ते चाइनीज़ माल की भरमार है ।

बजट की सार्थकता तो तभी सिद्ध होती है जब जन पक्षीय बजट पूर्व दुराग्रहो को दूर करते हुए लकीर का फ़कीर न बनते हुए पेश किया जाए ताकि आम जन भी कुछ राहत महसूस कर सके ।

बुधवार, 7 मार्च 2012

आप सबकी पहचान आपकी कलम ...















इस बार महिला दिवस और होली दोनो का एक साथ आ जाना ... कौन जाने किस सत्‍य से परिचित करा रहा है यह दिन ..सच कहूं तो रंग खिलते भी वहीं हैं जहां स्‍त्री का सम्‍मान होता है  इस सम्‍मान के लिए क्‍या कोई एक दिन निश्चित  होना चाहिए .. हम मन में विकास की सोच रखें ऊपर उठने की इच्‍छा को बलवती रखें और जड़ों को कमजोर करते चलें या उन्‍हें कलंकित करने में किसी तरह की कसर न छोड़ें ... हत्‍या कर दें गर्भ में जिसकी यह भूलकर कि हमारी जननी भी यही है ये न होगी तो हमारा अस्तित्‍व ही क्‍या ... इन सब बातों का सिलसिला लम्‍बा चल सकता है लेकिन ब्‍लॉग जगत में भी कई ऐसी शख्सियत हैं जिनकी लेखनी के आगे नतमस्‍तक होने को जी चाहता है मुझे लगा इन सबको एक साथ आपके सामने लाऊँ अपनी नज़र से सबसे पहले चलते हैं हम....  आप सबकी पहचान आपकी कलम ... और आपका अपना ब्‍लॉग .. जिसके माध्‍यम से हम अपनी बात अपने विचार सबके साथ साझा कर सकते हैं ...
आदरणीय रश्मि जी के ब्‍लॉग पर इस बार इनकी महिला दिवस पर लिखी गई पोस्‍ट एक गहन सच्‍चाई लिए हुए है जिससे हम इंकार नहीं कर सकते ... कितनी दृढ़ता से वे कह रही हैं नहीं चाहिये दिवस ....
आगे बढ़ते हुए नज़र जहां जाती है वहां आदरणीय संगीता स्‍वरूप जी दिखाई देती हैं ... जिंदगी की महाभारत
के साथ आदरणीय वंदना जी को पढ़ते हुए आगे बढ़ेंगे ... जहां हैं होली के अनोखे रंग ...रंगों की बातें ...
आदरणीय साधना जी की इस प्रस्‍तुति में जहां है ... प्रतीक्षा
यहां रेखा श्रीवास्‍तव जी होली की अद्भुत छटा बिखेर रही हैं रंगों के साथ  ... होली ... होली ... होली ...
रंगों की इस मस्‍ती के बीच शमा जी कहती हैं  ... दीवारें बोलती नहीं
तो वाणी जी का कहना है कुछ ये ... छोटी पहचान लम्बा इंतज़ार....
तो है पर डा. मोनिका जी बता रही हैं कि स्‍वयं ....तय करें अपनी प्राथमिकतायें
अपनी प्राथमिकताओं में मत भूलें ... रचना दीक्षित जी के अनुसार ... खबर की दुनिया
में एक नाम और भी है प्राथमिकता के साथ ... अर्चना चावजी  का
डा. दिव्‍या ने कहा है चिर युवा हैं भारत माता बिल्‍कुल सच उनकी बात से सहमत भी हूं ...
दर्द की बात हो यह क्षणिकाओं की एक नाम सबसे पहले आता है ... इनका हरकीरत हीर जी
फिर है मंद बयार जहां इंदु जी के शब्‍दों में उनका ब्‍लॉग हृदयानुभूति पर यहां देखा इन्‍ह‍ें तो आइए आप भी ..
आपके सानिध्य में दिन-रात जो रहने लगा हूँ....... ने कहा है मृदुला प्रधान जी ने ...
कहा तो कुछ मेरी कलम से .. में हैं आपके साथ रंजना भाटिया जी
 हंसकर जीवन ऐसे जिया बता रही हैं अनुपमा जी मेरी तो मंशा यही है कि
सबको साथ लेकर चलूं ... लेकिन कहीं आप सब मुझे मन ही मन ... कुछ कह तो नहीं रहे ... अब ज्‍यादा नहीं बस ...
हमारे ब्‍लॉग जगत की नई कलम के ऐसे हस्‍ताक्षर जिनकी चर्चा न हो तो सब सूना लगेगा ...
इनकी लेखनी भी बहुत ही सशक्‍त एवं परिपक्‍व है ... मिलते हैं अनुलता 'विद्या' जी से यहां ...
नारी सर्वत्र पूजिते ... बस कहते सुना है लोगों को ...  जिसने हिम्‍मत कभी ना हारी है वो नारी है ....
सखियों ने भेजा संदेश ... कह रही हैं अवंती सिंह जी यहां .. आओ होली आई है
आप सभी को साथ लाने का यह प्रयास था संभव हुआ या नहीं यह तो आप ही को बताना है ... शुभकामनाएं एक दिन की नहीं .... बल्कि हर दिन की चलते-चलते ... शिखा जी यहां हैं ...जय हो !




शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012

उसके लिए तो ... !!!















उजड़ जाना ... या वीरान होना
इससे तुमने क्‍या सोचा
जरूर मैं किसी गुलशन की बात कर रही हूँ
नहीं .. नहीं ... वहां तो बहार
प्रकृति ले ही आती है बसंत
खिल उठते हैं फूल
झूम उठती हैं टहनियॉं
धरती को चूमने के लिए
फिज़ाओं में घुल जाती है खुश्‍बू
बागवां के चेहरे पे चमक अनोखी होती है
इन दिनों ... पर
मेरी आंखों में
वीरानी तो उस घर की है
जहां के बच्‍चे परदेस में बस गए 
घर की सूनी दहलीज़ पे
ठहरती नज़रों को बस डाकिये का इन्‍तज़ार रहता 
शायद भूले से बच्‍चो ने लिख भेजा हो कुछ
मां को नहीं आता मैसेज लिखना
नहीं कर पाती ई-मेल बच्‍चों को
ये सुविधाएं होकर भी न होने जैसे होती हैं 
उसके लिए तो ...
मोबाइल पर ... जब घंटी बजती है तो
कई बार हरे की जगह वो लाल बटन दबा देती
और उसके बजने की आवाज भी बंद हो जाती
मन ही मन अपनी इस हरकत पर
खीझ उठती ...माँ
हर तरफ उदासी ही दिखती है उसे
दीवारों के रंग धुंधले नज़र आते हैं या उनमें भी
आंखों की उदासी उतर आई है
समझ नही पाती .... 

शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

चेहरे पे मुस्‍कान :) कैसे आएगी ...
















दु:खी होने के लिए
अब बड़ी घटनाओं की
जरूरत नहीं रही मन को
वो यूँ ही कभी  भी
हो जाता है अनमना
सब कुछ सही होते हुए
जब भी
नासमझी के लक्षण दिमाग में
उथल-पुथल कर देते
वक्‍़त-बेवक्‍़त
जब भी इसकी-उसकी परव़ाह की
बात होती
मन उदास हो जाता
अब मन उदास हो तो भला
चेहरे पे मुस्‍कान :)
कैसे आएगी
लक़ीर के फ़क़ीर बनोगे जब
तो सब कुछ
एक दाय़रे में सिमटकर
रह जाएगा फि़र
आज कौन किसकी परव़ाह करता है
सब अपने लिए जीते हैं
अपनी मैं को सर्वोपरि मानते हैं
खुद की खुशियाँ
खुद के सपने वो दिन गए
जब बेग़ानी शादी में  अब्‍दुल्‍ला दीवाना
हुआ करता था ...
ये ऐसी कड़वी बातें क्‍यूँ ?
नीम का दातुन किया था न
अभी तक उसका
कसैलापन गया नहीं
या फिर सबकुछ कसैला हो गया है  
शायद  इसीलिए....!!!