शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

चेहरे पे मुस्‍कान :) कैसे आएगी ...
















दु:खी होने के लिए
अब बड़ी घटनाओं की
जरूरत नहीं रही मन को
वो यूँ ही कभी  भी
हो जाता है अनमना
सब कुछ सही होते हुए
जब भी
नासमझी के लक्षण दिमाग में
उथल-पुथल कर देते
वक्‍़त-बेवक्‍़त
जब भी इसकी-उसकी परव़ाह की
बात होती
मन उदास हो जाता
अब मन उदास हो तो भला
चेहरे पे मुस्‍कान :)
कैसे आएगी
लक़ीर के फ़क़ीर बनोगे जब
तो सब कुछ
एक दाय़रे में सिमटकर
रह जाएगा फि़र
आज कौन किसकी परव़ाह करता है
सब अपने लिए जीते हैं
अपनी मैं को सर्वोपरि मानते हैं
खुद की खुशियाँ
खुद के सपने वो दिन गए
जब बेग़ानी शादी में  अब्‍दुल्‍ला दीवाना
हुआ करता था ...
ये ऐसी कड़वी बातें क्‍यूँ ?
नीम का दातुन किया था न
अभी तक उसका
कसैलापन गया नहीं
या फिर सबकुछ कसैला हो गया है  
शायद  इसीलिए....!!!

शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

बसन्‍ती गीत गुनगुना रही है ..














गेहूं की बाली ने कहा,
पीली सरसों से
देख आज पवन
मुस्‍करा रही है
लगता है ऋतु बसन्‍ती
आ रही है ...।
उधर कोयल की कूक से
मुस्‍कराती
टहनी आम की
झुककर धरती से बोली
देखो कोयल
बसन्‍ती गीत
गुनगुना रही है ...।
अम्‍बर ने कहा धरती से,
अब तो तू करना
खूब श्रृंगार
फूलों के खिलने
की ऋतु
बसन्‍ती जो आ रही है ...।

मंगलवार, 17 जनवरी 2012

कुछ कहना शेष था ....





















यह जीवन का कौन सा
अध्‍याय है
समझ नहीं पा रही हूं
कल जब से
मैने उस वृद्धा को
कचरे के ढेर पर बैठकर
रोटी के टुकड़ो को
साफ करने के बाद
आपने आंचल में
बांधते देखा
ना चाहते हुए भी
आंख नम हो गई .....
आवाज देकर पुकारने में
वह हड़बड़ा कर उठी
और तेज कदमों से
अंजान सी गली में
अदृश्‍य हो गई
उसके जाने के बाद भी
वह मुझे दिखाई देती रही
पूछता रहा मौन उसका
ये कौन सा अध्‍याय है
जिसमें अपनी  ही
लाचारी के बारे में
कुछ कहना शेष था ....

सोमवार, 2 जनवरी 2012

दर्द के एहसास ...














मौन की तड़प
बस इक संवाद
इस तड़प की
अवधि में
कितने पलछिन
गौण हो जाते हैं
जिनमें रिसते हुए
दर्द के एहसास
अनाम रह जाते है ...!!!

शनिवार, 3 दिसंबर 2011

स्‍माइली की भाषा :)



हर पीढ़ी अपनी भाषा गढ़ती है, अपनी बातों को अपनी भावनाओं को व्‍यक्‍त करने के लिए हर पी‍ढ़ी ने नये-नये तरीके ईज़ाद किए, कभी कबूतर तो कभी कोई खा़दिम जरिया होता था इनके संदेशों के आदान-प्रदान का फिर पोस्‍टकार्ड व अंतर्देशीय में रूचि बढ़ी इनके साथ-साथ भाये ग्रीटिंग कार्ड व ई-कार्डस भी, लेकिन परिवर्तन की बयार अभी थमी नहीं है क्‍योंकि आ चुके हैं आज की युवा पीढ़ी के स्‍माइली :) इनका परिचय आप सभी से हो ही चुका होगा देर-सेवर ही सही समझा हो आपने लेकिन एक सहज़ मुस्‍कान बिखेरते कब ये आपकी कम्‍प्‍यूटर स्‍क्रीन पर  या मोबाइल के इनबॉक्‍स में प्रकट हो जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता क्‍योंकि इस यंत्र का खुशनुमा चेहरा या दुखी  चेहरा अपनी कहानी सुना जाए ...या फिर दे जाए आपके चेहरे पर एक मुस्‍कान सुब‍ह-सुबह ... स्‍माइली की दुनिया अनोखी है भावनाओं के समंदर से निकले हर मोती की अपनी अलग ही आभा है जहां शब्‍द खो जाते हैं दुख के भंवर में वहां :-C आपकी भावनाओं को ये कह जाता है कुछ इस तरह से इसका व्‍याकरण नई पीढ़ी को तो खूब भाता है और वो इनके अर्थों से बखूबी वाकिफ़ भी हैं क्‍योकि रफ्तार और तेजी की अभ्‍यस्‍त युवा पी‍ढ़ी को स्‍माइली में समय की बचत दिखाई देती है सच भी है तो आइए हम भी चलते हैं जहां चेहरा एक ही है पर उसके भाव अनेक हैं ....

:-) ..........
खुश
:-D ............
बेहद खुश
:-( .............
उदास
:-C .............
बेहद उदास
:-P .............
जीभ चिढ़ाना
l-O .............
जम्‍हाई
:-/ .............
शक्‍की
l:-( .............
नाराज
8-O .............
स्‍तब्‍ध
<:-l .............
मूर्ख
%-( .............
हक्‍का-बक्‍का

शनिवार, 26 नवंबर 2011

ये खजाना तो ....!!!





















उसकी आंखो से दर्द
बयां होता था
पर फिर भी जाने कैसे
लबों पे उसके
तबस्‍सुम खेला करती
मैं हैरां होती
उसकी संजीदगी पे
वो मुझको समझाकर कहती
देख हंसी सब बांट लेते हैं
आंसू बांटना जरा
मुश्किल होता है
तूने सुना है न
ये कीमती होते हैं
फिर इसे कैसे बांटेगा कोई
ये खजाना तो बस
चुपचाप चोरी छिपे ही
लुटाना होता है  ....!!!

बुधवार, 9 नवंबर 2011

कैसे गया होगा ... !!!














कोई पलकों में
जाते-जाते भी
लम्‍हा बन
ठहर गया होगा
अश्‍कों की
नमी के बीच
वहम पाला
उसने खुशी का
बता भला
अपनों से दूर
वो हंसकर
कैसे गया होगा  ... !!!