सोमवार, 24 अगस्त 2009

वक्रतुंड महाकाय . . .


वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।

निर्विघ्‍नं कुरू में देव सर्व कार्येषु सर्वदा ।।

विध्‍नहर्ता, मंगलकर्ता भगवान गणेश आप सभी के साथ हमारे घर भी विराज चुके हैं, जब गणपति जी घर आयें हैं तो आइये जानते हैं इनके बारें में यूं तो इनके अनेक नाम हैं, परन्‍तु यह 12 नाम जो कि प्रमुख हैं

!! एकदन्‍त !! !! सुमुख !! !! कपिल !! !! गजकर्णक !! !! लम्‍बोदर !! !! विकट !!

!! विनायक !! !! धूम्रकेतू !! !! गणाध्‍यक्ष !! !! भालचन्‍द्र !! !! विध्‍न-नाश !! !! गजानन !!

पिता भगवान शिव

माता भगवती पार्वती

भाई श्री कार्तिकेय

बहन मॉं संतोषी

पुत्र दो (1) शुभ (2) लाभ

पत्‍नी दो (1) रिद्धि (2) सिद्धि

प्रिय भोग मोदक

प्रिय पुष्‍प लाल रंग के (विशेष) गुड़हल

प्रिय वस्‍तु दुर्वा (दूब)

वाहन मूषक

आप सभी को गणेश उत्‍सव की हार्दिक शुभकामनाएं

बुधवार, 22 जुलाई 2009

भारत रत्‍न डा. कलाम के साथ निन्‍दनीय व्‍यवहार


भारत रत्‍न पूर्व राष्‍ट्रपति एपीजे अब्‍दुल कलाम के साथ यहां इन्दिरा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हवाई अड्डे पर एक अमरीकी एयरलाइंस द्वारा जबरन जांच किये जाने के मामले को पूरे तीन महीने तक दबा कर रखा गया डा. कलाम कुछ दिनों पहले अमरीकी एयरलाइंस कांटिनेंटल एयरलाइंस से नेवार्क जा रहे थे लेकिन जब वह विमान में सवार होने के लिये एयरो ब्रिज की ओर बढ़े तो एयरलाइंस के अधिकारियों ने उन्‍हें पंक्ति में खड़े होने को कहा, इस पर उनके साथ आए अधिकारियों ने एयरलाइंस के कर्मचारियों को पूर्व राष्‍ट्रपति के बारे में जानकारी दी जिसे सुनकर भी अनसुना कर दिया गया और डा. कलाम के पर्स, मोबाइल निकलवा लिये उनके जूते भी उतरवाकर जांच की और फिर उन्‍हें विमान में सवार होने दिया।

इस बारे में जो कोई भी सुनता है व पढ़ता है उसे चोट पहुंचती है पूरे देश में उनकी लोकप्रियता से कोई भी अछूता नहीं है फिर भी ऐसे गणमान्‍य ना‍गारिक के साथ ऐसी हरकत होना विचारणीय हो जाता है पूरे देश में कांटिनेंटल एयरलाइंस की इस हरकत की आलोचना की जा रही है परन्‍तु इनका कहना है कि डा. कलाम को सुरक्षा जांच में छूट नहीं है, वे भारत में अपनी एयरलाइन्‍स चला रहे हैं और अमेरिकी आंतरिक सुरक्षा के नियमों की बात कर रहे हैं। परन्‍तु उन्‍हें किसके साथ कैसा व्‍यवहार करना है इसका ध्‍यान तो रखना ही होगा, सरकार को भी ऐसे मामलों में किसी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतना चाहिए ताकि भविष्‍य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

बुधवार, 1 जुलाई 2009

जादू लता जी का ....अगला भाग



लता जी : हां, इसके बाद पंडित जी से अगली मुलाकात मुम्‍बई में हुई जहां मैं एक चैरिटी के लिए गा रही थी । मैने आरजू फिल्‍म का गाना अजी रूठ कर अब कहां खत्‍म किया था कि पंडित जी की फरमाइश आई अरे लता, ऐ मेरे वतन के लोगों गाओ। मैने उनकी फरमाइश पूरी की। पंडित जी तब थोड़े अस्‍वस्‍थ्‍य चल रहे थे, इसलिए बहुत देर नहीं रूक सके, उनके जाते समय कामेडियन गोप के भाई रामकमलानी ने मुझसे आकर कहा, लता पंडित जी तुम्‍हें बुला रहे हैं । पंडित जी कार में अपनी बहन विजयलक्ष्‍मी के साथ थे, पंडित जी बोले मैं बहुत प्रसन्‍न हूं, मैं तुम्‍हे गाते हुये सुनने ही आया था। कहकर वह चले गये, 27 मई 1964 को मैं कोल्‍हापुर में थी, तभी पता चला वे नहीं रहे, वह बहुत दु:खद दिन था।

नसरीन मुन्‍नी कबीर : भारतीय संगीत और राजनीति के महान लोग गुजर चुके हैं ....।

लता जी : मैं उन लोगों को सिर झुका कर नमन करती हूं, उनके गुजरने के बाद फिल्‍म संगीत के उस अच्‍छे वक्‍त की अब यादें हीं शेष हैं ।

अब आप पढ़ेगे एक खास बात और वह यह है . . .

चौंक गए !

क्‍या आप जानते हैं कि लता जी छुट्टियों का सर्वश्रेष्‍ठ आनन्‍द किस प्रकार लेती हैं ? जवाब है : लास वेगास (अमेरिका) में स्‍लॉट मशीनों पर रात भर दांव लगाना

नसरीन मुन्‍नी कबीर : उम्‍मीद करती हूं कि आप एस.डी. बर्मन के बारे में कुछ बताएंगी ?

लता जी : वे अतुलनीय संगीतकार थे, किन्‍तु काफी फिक्रमंद रहते थे । मुझे कभी-कभी सायनस की शिकायत रहती थी और रिकार्डिंग नहीं कर पाती थी, ऐसे में वे उत्‍तेजित होकर कहते थे, अरे लता नहीं करेगी तो भला मेरे गाने का क्‍या होगा ? वो खुद भी गजब के गायक थे, बंगाली लोक शैली में उनके गाए गानों का शायद ही कोई जवाब हो, अगर उनके हिसाब से गाना ठीक बने तो पीठ पर एक धौल का आशीर्वाद पक्‍का था। वे पान के बहुत शौकीन थे, यदि आपने उन्‍हें खुश कर लिया तो उनकी ओर पान की पेशगी पक्‍की। बाकी किसी की क्‍या मजाल कि उनसे पान खाने को पा जाये।

नसरीन मुन्‍नी कबीर : और किशोरकुमार क्‍या वे वाकई एक असामान्‍य व्‍यक्तित्‍व के धनी थे

लता जी : उनके बारे में कहां से शुरू करूं, वे मनमौजी व्‍यक्ति थे और जब हम स्‍टूडियो में गाना गा रहे होते तो कुछ भी हो न हो, पर हंसी का दौर जारी रहता था। वे स्‍टूडियो में कभी भी नाचने लगते तो कभी मुंह बनाकर गाना नहीं गाने देते।

उनसे पहली मुलाकात भी बहुत दिलचस्‍प थी। मैं खेमचन्‍द प्रकाश जी के साथ काम कर रही थी, उस मैं ग्रांट रोड मलाड के लिए ट्रेन का सहारा लेती थीा एक दिन महालक्ष्‍मी स्‍टेशन से किशोर दा भी मेरे कंपार्टमेंट में चढ़े वे कुर्ता, पजामा पहने और गले में स्‍कार्फ लपेटे थे, मेरे ही साथ गाड़ी से उतरे और तांगा किया। मैं घबरा गई, जब वे स्‍टूडियो तक पीछे चले आए। मैं भागकर खेमचन्‍द्र जी के पास पहुंची और बोली, अंकल, वो लड़का लगातार मेरा पीछा कर रहा है। तब खेमचन्‍द्र जी ने बताया, अरे यह तो किशोर है। अशोक कुमार जी का भाई। फिर हम एक दूसरे से परिचित हुये। उसी दिन हमने किशोर के साथ फिल्‍म जिद्दी का ये ये कौन आया रे करके सोलह सिंगार गाया, प्‍लेबैक सिंगर के रूप में किशोर की यह पहली फिल्‍म थी।

नसरीन मुन्‍नी कबीर : इस फिल्‍म ने देवानन्‍द को भी स्‍टार बना दिया। खेमचन्‍द्र प्रकाश जी के मशहूर गीत आयेगा आने वाला के बारे में आप क्‍या कहती हैं ? इसके बारे में कुछ याद आता है ?

लता जी: आयेगा आने वाला गीत के समय रिकार्डिंग तकनीक इतनी विकसित नहीं थी, इस गीत के लिए माइक को कमरे के बीच में रखा गया था और मुखड़ा खामोश है जमाना को गाते हुये मैं माइक तक बढ़ती थी और माइक तक पहुंच कर आयेगा आने वाला की पंक्ति गाती थीा कई रिटेक हुए, तब कहीं जाकर यह गीत रिकार्ड हो सका।

आभार ।

पुस्‍तक का नाम : लता मंगेशकर . . . इन हर ओन वॉयस, कनवर्सेशन विद नसरीन मुन्‍नी कबीर प्रकाशक : नियोगी बुक्‍स

सोमवार, 29 जून 2009

जादू लता जी का कायम है आज भी . . .


हम सबने लता जी को तो बहुत बार सुना, उनकी आवाज का जादू आज भी पूर्ववत कायम है, आज आपके सामने प्रस्‍तुत हैं उन पर लिखी गई पुस्‍तक के कुछ अंश जिसमें मिलेंगे लता जी की जिन्‍दगी के अनछुए पहलू . . . बात 1949 की है जब फिल्‍म महल का गीत आयेगा आने वाला हर तरफ धूम मचाये हुये था। रेडियो पर हर फरमाइश के बाद श्रोता उस गायिका के नाम से परिचित होना चाहते थे,जिसकी आवाज ने यह करिश्‍मा कर दिखाया था, आखिर एच.एम.वी. ने गायिका के नाम की घोषणा की और यह थीं लता मंगेशकर, आज लता जी 80 वर्ष की है, लेकिन उनकी आवाज आज भी 20 साल की उम्र पर ठहरी हुई है।

लंदन निवासी प्रसिद्ध वृत्‍तचित्र निर्देशिका नसरीन मुन्‍नी कबीर ने चैनल 4 के लिये लता जी के जीवन पर 6 भागों का एक वृत्त चित्र बनाया था। इन्‍हीं साक्षात्‍कारों के आधार पर लिखित अंग्रेजी पुस्‍तक लता मंगेशकर ...इन हर ओन वॉयस 15 मई 2009 को पाठकों के सामने आई है। प्रस्‍तुत हैं इस पुस्‍तक के कुछ अनुवादित अंश, जो खोलते हैं स्‍वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के जीवन के कुछ पन्‍नों को

नसरीन मुन्‍नी कबीर : मुझे मालूम पड़ा था कि जब आपने ऐ मेरे वतन के लोगों गीत गाया था, तब पंडित नेहरू की आंखों में आंसू आ गए थे। यह कब हुआ था

लता जी : यह गीत भारत पर चीन के 1962 के आक्रमण के बाद प्रदीप जी ने लिखा था, सी. रामचन्‍द्र ने इसे स्‍वरबद्ध किया था। इसे सबसे पहले गणतंत्र दिवस पर दिल्‍ली में 26 जनवरी 1963 को गाया गया था। वहां पर फिल्‍म इंडस्‍ट्री से जुड़े कई दिग्‍गज दिलीप कुमार, महबूब, राजकपूर नौशाद, शंकर जयकिशन, मदन मोहन आदि भी उपस्थित थे। मैं गीत खत्‍म करके मंच के पीछे कॉफी पीने गई, तभी महबूब साहब भागते हुये आये और आवाज दी, लता, लता कहां हो ? पंडित जी तुमसे मिलना चाहते हैं। मैं उनके साथ पंडित जी के पास गई और महबूब साहब ने मेरा परिचय कराते हुये, कहा, पंडित जी यह लता है । पंडित जी बोले, बेटा तुमने तो आज मुझे रूला दिया। मैं घर जा रहा हूं। तुम भी साथ चलो, हमारे यहां एक कप चाय पीने के लिए ।

हम सब तीन मूर्ति भवन गये, जो तब प्रधानमंत्री का निवास हुआ करता था। मैं कुछ शर्मीले स्‍वभाव की हूं, इसलिए भीड़ से अलग कोने में खड़ी थी, तभी इन्दिरा जी वहां आईं और बोलीं, अरे आप यहां है। मैं आपको आपके दो बड़े प्रशंसकों से मिलवाना चाहती हूं। ये प्रशंसक थे राजीव और संजय। ठीक इसी समय पंडित जी की आवाज आयी अरे वो गायिका कहां हैं ?’ मैं कमरा पार करके उनके पास गई तो वे बोले क्‍या तुम वह गीत एक बार फिर गाओगी ? मैने नम्रतापूर्वक कहा, अभी नहीं ।

नसरीन मुन्‍नी कबीर : क्‍या आपकी उनसे दोबारा मुलाकात हुई ?

पुस्‍तक का नाम : लता मंगेशकर . . . इन हर ओन वॉयस, कनवर्सेशन विद नसरीन मुन्‍नी कबीर प्रकाशक : नियोगी बुक्‍स

क्रमश:

शुक्रवार, 26 जून 2009

नकली नोटों से सावधानी ऐसे बरतें . . .


वैसे तो इन दिनों नकली नोटों से सावधानी बरतने के सम्‍बंध में कहा ही जा रहा है, खासतौर पर यदि यह नोट 1000 और 500 के हों तो ध्‍यान देना भी चाहिए, फिर भी छोटी-छोटी बारीकियां जिन पर यदि थोड़ा ध्‍यान दे दिया जाये तो, होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है, ऐसी ही जानकारी आप सबके सामने है जो कि एक समाचार-पत्र में प्रकाशित हुई थी।

गुरुवार, 25 जून 2009

हृदय रोगियों के लिये वरदान बना यह हास्पिटल

अभी पिछले दिनों ही पढ़ने में आया कि ऐसा भी हास्पिटल है जहां हृदय रोगियों का नि:शुल्‍क इलाज किया जाता है, तो सोचा इसे आपके समक्ष प्रस्‍तुत करूं हो सकता है कि इसका लाभ किसी ऐसे व्‍यक्ति को मिले जिसे कि वास्‍तव में इसकी जरूरत हो, तो इस संस्‍थान के बारे में संक्षिप्‍त जानकारी :

हृदय रोगों से पीडि़त व्‍यक्तियों के लिये बेंगलुरू के व्‍हाइटफील्‍ड इलाके में स्थित श्री सत्‍य साईं इंस्‍टीट्यूट आफ हायर मेडिकल साइंस हास्पिटल किसी मंदिर से कम साबित नहीं हो रहा है । यहां आने वाले सभी हृदय रोगियों का इलाज नि:शुल्‍क किया जाता है।

जीं हां, बिल्‍कुल सही बात है यह यहां न केवल हृदय की सभी बीमारियों का इलाज नि:शुल्‍क होता है, बल्कि हास्पिटल में उच्‍च स्‍तर की सभी चिकित्‍सकीय सुविधाएं मुहैय्या कराई जाती हैं । यहां आने वालों का इलाज मानवता के लिये किया जाता है, न कि धर्म, जाति या आर्थिक स्थिति को आधार मानकर, इस सन्‍दर्भ में अपील आफ द पीस प्राइज लॉरेट्स फांउडेशन के चेयरमैन डा. माइकल नोबेल कहते हैं, ‘’मैने धरती पर ऐसा पहले कहीं नहीं देखा। यह पश्चिम देशों में स्थित राष्‍ट्रीय चिकित्‍सालयों से भी अद्भुत अनुभूति प्रदान करता हैा श्री साईं बाबा द्वारा बनवाया गया यह हास्पिटल तीन पहलुओं के कारण अधिक प्रभावशाली है : पहला स्‍टेट आफ आर्ट टेक्‍नोलाजी, दूसरा निशुल्‍क चिकित्‍सकीय सुविधा और तीसरा साईं बाबा की उपस्थिति जो रोगियों को चमत्‍कारिक रूप से अच्‍छा कर देती है।‘’

यह विश्‍व का पहला ऐसा हास्पिटल है, जो हृदय रोग की किसी भी बीमारी के इलाज के लिये पैसा नहीं लेता है। सबसे बड़ी बात यहां कोई बिलिंग काउंटर नहीं है।

बुधवार, 24 जून 2009

जवाब . . . कसरत दिमाग की ???

जवाब - अपराध आत्‍महत्‍या का था

कल मेरा आपसे सवाल था ??

एक अपराध हुआ है और एक जान गई है,
पुलिस को मरने वाले शख्‍स का नाम, पता
और अन्‍य जान‍कारियां हैं, इसके बावजूद
अपराध करने वाले पर कोई मुकदमा नहीं
चल सकता है, क्‍यों ?