शुक्रवार, 31 अगस्त 2012

उसे पता था .. !!!

जड़ों को विस्‍तार देती
धरती ने
कभी भी पेड़ को
भार नहीं माना
उसका विशालता से
कभी नहीं सहमी
उसे पता था
उसका साया आकाश है ...
..........................................

प्रेम
इस ढाई अक्षर ने
कितनों की जिन्‍दगी के
मायने बदल दिये
जिनके पास यह होता है
उनके पास एक
विस्‍तृत आकाश होता है
जिनके पास से
यह चला जाता है
उनके पास आंसुओं का
पूरा सैलाब होता है
....





7 टिप्‍पणियां:

  1. रश्मि जी ने बिलकुल सही कहा है!

    जिनका ये आकाश चला जाता है उनके पास सिवाय आंसुओं के और रह ही क्या जाता है!

    कुँवर जी,

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  2. बहुत सुन्दर गहन अनुभूति....
    सुन्दर....
    :-)

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  3. जीवन की गहरायी में पैठ कर पाये गये मोती हैं ये उक्तियाँ !

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