सोमवार, 16 जुलाई 2012

कुछ बूंदे उम्‍मीद की !!!

कुछ बूंदे उम्‍मीद की
बरसी हैं बादलों से झगड़कर
आईं हैं धरती पर प्‍यास बुझाने उसकी
मिलकर माटी से हो गई हैं माटी
सोंधेपन की खुश्‍बु जब
लिपट गई गई झूम के बयार से
सावन ने हथेली में लिया प्‍यार से
उम्‍मीद की कुछ बूंदों को
मेंहदी में मिलाकर
रचा लिया जो हथेलियों को
...
कुछ बूंदे उम्‍मीद की
बरसी हैं
किसान की आंखों से
बीज़ बो आया है धरती में
अभिषेक उसका ये सफल होगा
आने वाला कल शीतल होगा
...

19 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया कविता... बहुत सुद्नर

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  2. शीतल संभावनाएं-
    सुख की आस |
    सादर ||

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  3. ज़रूर रहत देंगी कुछ बूँदें उम्मीद की !

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  4. कुछ बूंदे उम्‍मीद की
    संवार देती हैं
    आने वाला कल
    सुन्दर रचना... आभार

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  5. उम्‍मीद की कुछ बूंदों को
    मेंहदी में मिलाकर
    रचा लिया जो हथेलियों को
    ...वाह क्या बात है

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  6. उम्मीदों की सफल अभिव्यक्ति ...

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  7. कुछ बूंदे उम्‍मीद की
    बरसी हैं
    किसान की आंखों से
    बीज़ बो आया है धरती में
    अभिषेक उसका ये सफल होगा
    आने वाला कल शीतल होगा
    ...
    सुंदर पंक्तियाँ...

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  8. कुछ बूंदे उम्‍मीद की
    बरसी हैं
    किसान की आंखों से
    बीज़ बो आया है धरती में
    अभिषेक उसका ये सफल होगा
    आने वाला कल शीतल होगा
    ...बहुत खूब!
    उम्मीद ही से ही शुरुआत है .

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  9. सही है ..
    किसानों की उम्‍मीद हैं बारिश की बूंदें ..

    समग्र गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष

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  10. आमीन ... उम्मीद की ये बूँदें यूं ही बरसती रहनी चाहियें ...

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  11. उम्मीद की बूँद सदा बरसती रहे सभी पर
    बहुत सुन्दर विचार व्यक्त करती रचना:-)

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  12. कुछ बूंदे उम्‍मीद की
    बरसी हैं
    किसान की आंखों से
    बीज़ बो आया है धरती में
    अभिषेक उसका ये सफल होगा
    आने वाला कल शीतल होगा

    हर किसी की कुछ न कुछ उम्मीद बंधी होती है इन बूंदों से ....
    बेहतरीन व सुंदर !!

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  13. उम्मीद की कुछ बूँदे ही पर्याप्त होती है निराशा के भाव को मिटाने के लिए ।

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  14. अपनी-अपनी आस। अपने-अपने सुख।

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  15. सावन ने हथेली में लिया प्‍यार से
    उम्‍मीद की कुछ बूंदों को
    मेंहदी में मिलाकर
    रचा लिया जो हथेलियों को

    ...बहुत खूब! बहुत मनभावन अभिव्यक्ति..

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