शनिवार, 27 अगस्त 2011

पूरी हथेली ... !!!!












(1)
अक्षर जैसे एक अकेली उंगली
शब् जैसे कोई
पूरी हथेली ... !
शब् का अर्थ
वज़न अपनी बात का .... !!
पंक्ति हो जाती यूं
जैसे धरती पे साया आकाश का ......!!!!

(2)
कितना भी
तन तेरा दुर्बल हो,
जीते जी
मन की हार नहीं होने देना,
दुर्गम हो पथ कितना भी
आगे बढ़ना ...
मन को
थकन का भार नहीं होने देना ....

20 टिप्‍पणियां:

  1. कितना भी
    तन तेरा दुर्बल हो,
    जीते जी
    मन की हार नहीं होने देना, ... kyonki mann ke hare haar hai, mann ke jite jeet

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  2. बहुत प्रेरक और ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति..

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  3. dono rachna bahut umda. prerak shabd...

    दुर्गम हो पथ कितना भी
    आगे बढ़ना ...
    मन को
    थकन का भार नहीं होने देना ....

    shubhkaamnaayen.

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  4. दोनों क्षणिकाएं बहुत सुन्दर है ... पहली वाली खास कर अच्छी लगी

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  5. वाह सदा जी दोनो क्षणिकाएं बहुत सुंदर । अक्षर जैसी उंगली और वाक्य जैसी हथेली बहुत सुंदर उपमाएं ।

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  6. आपको सपरिवार
    नवरात्रि पर्व की बधाई और
    शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  7. कितना भी
    तन तेरा दुर्बल हो,
    जीते जी
    मन की हार नहीं होने देना,
    bhut sundar pankti.

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  8. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 29 -12 - 2011 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज... जल कर ढहना कहाँ रुका है ?

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  9. शब्‍द जैसे कोई
    पूरी हथेली ... !
    वाह बहुत बढ़िया...
    सादर.

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  10. गहन भाव भरी सुंदर प्रस्तुति के लिए बधाई

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