शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

वह बस शून्‍य ....

जिन्‍दगी गणित

परिस्थितियां सम- विषम

वह बस शून्‍य की तरह

.................................

दुख का कारण

उसका निवारण

कारक मन

फिर भी निर्मल मन

को किसकी तलाश है ...


9 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर रचना . बधाई स्वीकारें

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपका लेखन यक़ीनन उत्कृष्ट है
    तारीफ़ में कुछ भी कहना बहुत मुश्किल होता है.........बंधाई स्वीकारें

    उत्तर देंहटाएं