मंगलवार, 15 मार्च 2011

एक दु:खी आदमी ..... (लघुकथा)
























एक आदमी था . नाम कुछ भी रख दो, क्या फर्क पड़ता है ! हर दो कदम पर ऐसा आदमी दिख जायेगा .... हाँ तो एक आदमी था , वह
हमेशा दुखी रहता था .खुद को असहाय समझता ... सब उसे खुश रखने का प्रयास करते पर उसे कोई न कोई शिकायत हो ही जाती और
शिकायत भी रबर जैसी खींचती जाती ! अपने दुःख का इज़हार करने की खातिर वह अजनबियों से अपना दर्द सुनाता . उसके अपने परेशान
होते, दुखी होते पर उसे इसकी परवाह नहीं थी . अपनी सोच के आगे उसे हर बात बौनी और उबाऊ लगती . किसी के साथ कोई बड़ी बात
होती तो वह मुंह बिचका देता या बात को आई गई करने की सलाह देता पर खुद वह किसी बात को आई गई नहीं करता था . परिणामतः वह
हमेशा बीमार रहता , अन्दर की कुधन उसे चैन से सोने नहीं देती और वह शून्य में बडबडाता रहता .
प्यार करनेवाले उकताने लगे , उसे आते देख वहाँ से हट जाते ... वह उनको ही याद दिलाता कि पहले तो ऐसा नहीं था , पर वह खुद इस बात
को कभी नहीं समझ सका और जितना कुछ भगवान् ने उसे दिया था , वह सब ख़त्म हो गया !!!

' कमी निकालने से पहले खुद का भी आकलन ज़रूरी है '


15 टिप्‍पणियां:

  1. बेवजह के दुःख का कोई इलाज नहीं

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  2. जो इंसान हमेशा संतुष्ट रहता है उसे भगवान सब कुछ देता है पर अगर कोई हमेशा दुखी हो और कभी भी संतुष्ट न रहे तब उसका कोई उपाय नहीं!

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  3. बहुत दिलचस्प .... बहुत रोचक ....

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  4. सोचने पर मजबूर करती है लघु कथा। आपको सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनायें।

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  5. बढ़िया सीख देती कथा !
    आपको और आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएं !

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  6. आपका यह ब्लॉग तो कभी देखा ही नहीं ..... आज अचानक ही नज़र पड़ गयी :)

    अच्छा सन्देश देती लघु कथा

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  7. मेरी लड़ाई Corruption के खिलाफ है आपके साथ के बिना अधूरी है आप सभी मेरे ब्लॉग को follow करके और follow कराके मेरी मिम्मत बढ़ाये, और मेरा साथ दे ..

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  8. बहुत रोचक लघुकथा है...प्रेरक भी.

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  9. sada ji
    bahut hi badhiya lagi aapki yah laghu -katha
    waqai yah bilkul sach hai ki jab aadmi swayam se bahut pareshan rahta hai to use apna dukh hi jyada bada najar aata hai,dusaro ki baaaate uske liye nagany ho jaati hai .is karan vah kabhi santusht nahi rah pata .akhir samjhane wale bhi kitna samjhayenge antatah vo bhi use uske hal par chhod dete hain .
    bahut hi sandesh -parak sundar abhivykti
    badhai
    poonam

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  10. दुख तो सुख के कारण (दूसरों के) भी होता है

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  11. मुझे हंसी आयी आपकी लघु कथा पढ़ कर , क्यूँ कि आपके ऐसे ही एक पात्र को मै भी जानता हूँ.
    बहुत बेबाक कहानी और कथा चित्रण.

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  12. आधुनिक जीवन में यदि आदमी सतर्क ना रहे तो उसे इस तरह का दुःख कब मिल जायेगा कहा नहीं जा सकता. आजकल तनावरहित जीवन भी तो एक ख्वाब हो गया है. वर्तमान स्थितियों का मार्मिक चित्रण.

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  13. बढ़िया सीख देती कथा| धन्यवाद|

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