मंगलवार, 27 अक्तूबर 2009

सुनहरी धूप ....


धूप सुनहरी कभी इतनी हो जाती कि उसकी चमक आंखों में समा जाती ऐसे कुछ दिखाई न देता चमक के सिवा सूरज इस समय अपनी चरम सीमा में होता, उसे देख पाना इन नाजुक निगाहों से कितना मुश्किल होता है, जैसे सफलता के पायदानों की अन्तिम सीढ़ी पर जब पैर पड़ता है तो कुछ लोगों को सब कुछ बौना दिखाई देता है वे सिर्फ सोचते हैं कि वे ही श्रेष्‍ठ कर्ता हैं, उन्‍होंने ही कर्म किया, बाकि सब नगण्‍य, बहुत फर्क होता है इस मानवी सोच के परे जाना, भूल जाते हैं वह सूरज अपनी इस चरम सीमा पर ऊर्जा देता है जीवन को जीने की, नहीं भूलता वह ढलना सांझ को, स्‍वर्णिम आभा बिखेरना शाम को, जब पक्षियों के लौटने का समय होता है तो शीतल बयार के बीच ढलता सूरज अपने प्रकाश से दिशा निर्देशित करता है ।

तकते हैं राह,

घर बैठे नन्‍हे छौने,

आएंगे दाना लेकर

उनके अपने ।

चोंच में प्रेम से

अन्‍न के कुछ दाने,

लाएंगे

उनके लिए

जिन्‍होंने सीखा नहीं

उड़ना ।

उनकी उड़ानों को भी

पर लग जाएंगे

एक दिन वे भी

दूर गगन में जाएंगे

16 टिप्‍पणियां:

  1. haan! ek din unke bhi par lag jayenge aur door gagan mein ud jayenge.....

    bahut khoobsoorti se aapne is kavita ko shabdon ke roop mein ubhaara hai.........


    bahut achchi lagi yeh kavita.....

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  2. जिन्होंने सीखा नहीं उड़ना
    एक दिन वो भी दूर गगन में जायेंगे |
    गहरे भावों वाली रचना

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  3. उडानो को जब पर लगते है तो ऐसा ही होता है.
    बहुत सुन्दर अत्यंत प्रगाढ और गूढार्थ लिये रचना

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  4. अत्यन्त कोमलकान्त कविता...........

    वाह वाह आनन्द आ गया

    अभिनन्दन !

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  5. अच्छी रचना के लिए बहुत बधाई
    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  6. उनकी उड़ानों को भी
    पर लग जाएंगे
    एक दिन वे भी
    दूर गगन में जाएंगे

    बहुत बढ़िया.....

    उत्तर देंहटाएं
  7. तकते हैं राह,

    घर बैठे नन्‍हे छौने,

    आएंगे दाना लेकर

    aati sunder

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  8. unki udaanoN ko bhi
    par lag jaayenge....

    vishwaas ke jazbe se
    maarg-darshan karti hui
    nayaab rachnaa

    उत्तर देंहटाएं
  9. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
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  11. तकते हैं राह,घर बैठे नन्‍हे छौने,

    आएंगे दाना लेकर उनके अपने ।

    चोंच में प्रेम से अन्‍न के कुछ दाने,
    सच यूं ही देखतें हैं हमारे बच्चे
    हमारी राह जीवंत कविता
    आभार

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  12. कम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।
    बहुत सुन्दर रचना । आभार

    ढेर सारी शुभकामनायें.

    SANJAY KUMAR
    HARYANA
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  13. अच्छी रचना के लिए बहुत बधाई
    धन्यवाद

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