मंगलवार, 1 जनवरी 2013

जाने कितनी बार !!!

जब से हालात बदले हैं
हर पिता का मन
मां की सोच का समर्थन
करने लगा है
...
कभी हँस कर टाल दिया करता था
जो मन माँ की सोच को
तुम तो नाहक ही चिं‍ता करती हो
वह अब बिटिया के जरा सी देरी पर
अन्‍दर बाहर होता है ....
शाम ढले जाने कितनी बार !!!

10 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 05/01/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  2. कितना कुछ पल में बदल जाता है .

    उत्तर देंहटाएं
  3. इस सोच में बदलाव लाने की ज़रूरत है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. घड़ी की टिक टिक हथौड़े सी चलती है ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. सचमुच एक भय का मातमी वातावरण छा गया है..पर यह ज्यादा दिन नहीं रहेगा..यही आशा है

    उत्तर देंहटाएं
  6. एक दिल देहला देनेवाला सच ....!

    उत्तर देंहटाएं
  7. सच कभी हँस कर टाल दिया करता था
    जो मन माँ की सोच को
    तुम तो नाहक ही चिं‍ता करती हो
    वह अब बिटिया के जरा सी देरी पर
    अन्‍दर बाहर होता है ....
    शाम ढले जाने कितनी बार !!!

    उत्तर देंहटाएं
  8. एक सार्थक रचना । बधाई । सस्नेह

    उत्तर देंहटाएं