शनिवार, 24 नवंबर 2012

हारकर भी ... !!!

प्रेम को तुम
जिंदगी बनाना तो
सम्‍मान से !
.....
प्रेम जब भी
खामोश होता है तो
जता जाता है !
....
अपना दर्द
छुपाया तो जाना ये
कैसा होता है !
...
हारकर भी
जो नहीं हारता है
वही विजेता !
...
जीत की भाषा
सिर्फ अहसास से
समझी जाती !
...

14 टिप्‍पणियां:

  1. हारे नहिं जो हार कर, विजय करे वह सत्य ।

    वाह वाह क्या बात है, बने सदा अधिपत्य ।।

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  2. प्रेम जब भी
    खामोश होता है तो
    जता जाता है !

    बहुत सुंदर ... सटीक बात

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  3. बहुत ही बेहतरीन क्षणिकाएं...
    अति सुन्दर..
    :-)

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  4. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  5. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह सुन्दर प्रविष्टि कल दिनांक 26-11-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  6. बहुत प्यारी एवँ प्रेरक क्षणिकाएं हैं सदा जी ! आनंद आ गया पढ़ कर ! ढेर सारी शुभकामनायें !

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  7. हारकर भी ... !!!
    प्रेम को तुम
    जिंदगी बनाना तो
    सम्‍मान से !
    .....
    प्रेम जब भी
    खामोश होता है तो
    जता जाता है !
    ....
    अपना दर्द
    छुपाया तो जाना ये
    कैसा होता है !
    ...
    हारकर भी
    जो नहीं हारता है
    वही विजेता !
    ...
    जीत की भाषा
    सिर्फ अहसास से
    समझी जाती !
    ...
    प्रस्तुतकर्ता सदा पर 12:57 pm

    हाँ एक एहसास ही है प्रेम ,एह्सासाते प्रेम .बढ़िया प्रस्तुति ,प्रेम में जीत और हार क्या ,प्रेम फिर प्रेम है न हो तो हार है।

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  8. क्षणिकाओं में शाश्वत प्रेम की सुंदर व्याख्या,वाह .

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  9. क्षणिकाओं में शाश्वत प्रेम की सुंदर व्याख्या,वाह .

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  10. प्रेम जब भी
    खामोश होता है तो
    जता जाता है !
    काफी सुंदर भाव !

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  11. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 12/12/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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