गुरुवार, 10 जून 2010

किसी का गिला ...





किसी का गिला किसी से किया,

दिल का बोझ अपने हलका किया ।

भर गया सब्र से प्‍याला आंखों का,

उन्‍हें चंद अश्‍कों से छलका दिया ।

9 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन अभिव्यक्ति...कुछ सी बोलो में बहुत कुछ बोल दिया जी...

    कुंवर जी,

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  2. भर गया सब्र से प्‍याला आंखों का,

    उन्‍हें चंद अश्‍कों से छलका दिया ।

    Bahut achhe...Waahhh!!!!

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  3. सदा जी अगर दूसरी पंक्ति कुछ इस तरह हो तो -दिल का बोझ अपना हल्‍का किया।

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  4. आप सबका बहुत-बहुत आभार, उत्‍साहवर्धन के लिये, उत्‍साही जी आपके सुझाव के अनुसार दूसरी पंक्ति में सुधार कर इसे परिवर्ति‍त करते हुये मुझे खुशी होगी ।

    धन्‍यवाद ।

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