सोमवार, 1 जून 2009

आवश्‍यक होता मोबाइल . . .


मिस काल . . .कुछ याद आया आपको . . . अरे भई आज हम मोबाइल युग में जी रहे हैं जहां अधिकांशत: लोग मोबाइल धारी या जिनके पास मोबाइल नहीं है वह इसे लेने के इच्‍छुक हैं जब से हम मोबाइल का उपयोग अपने दैनिक जीवन में करने लगे हैं तभी से मिस काल का प्रयोग भी आम हो गया है ये काल दो दोस्‍तों के बीच भी हो सकती है, या फिर वह प्रेमी युगल हों अथवा पति-पत्‍नी अथवा बच्‍चे भी हो सकते हैं इस मिस काल के कई छुपे संदेश भी होते हैं जिन्‍हें आप अपनी सुविधानुसार समझ लेते हैं, जैसे की मैं फलां जगह पहुंच जाऊंगा तो मिस काल दूंगा, तुम घर से निकलना तो मिस काल कर देना मैं तुम्‍हें बाहर ही मिल जाऊंगा होने लगा है, मिस काल आने पर यह कहा जाता है कि मैने तुम्‍हे याद किया तो मिस काल किया . . . तो जिसके नम्‍बर पर यह मिस काल आता है वह भी वापस इसी तरह एक रिंग कर देता है जिसका अर्थ आसानी से यह भी लगाया जा सकता है कि मैं भी तुम्‍हें ही याद कर रहा हूं, या मैने तुम्‍हें याद किया ।

मिस काल की कहानी तो मजेदार है ही इससे भी ज्‍यादा आजकल एस.एम.एस. का चलन है उसमें भी गुदगुदाते चुटकले या फिर शायरी जिन्‍हें शायरी का शौक नहीं था उन्‍हें भी एस.एम.एस. के चलते शायरी करनी पड़ जाती है और समय व्‍यतीत करते हैं, इसके अलावा कई रियेलिटी शो भी इस एस.एम.एस. के लिये आम पब्लिक की जेबों से कितना पैसा निकलवा लेते हैं लोगों को पता ही नहीं चलता यदि आप इस गायक को विजेता बनाना है तो वोट करें, कई न्‍यूज चैनल भी सवाल-जवाब के चलते आपको एस.एम.एस. करने के लिये प्रेरित करते रहते हैं और चैनल वाले इसी तरह एक एस.एम.एस. की मांग करके करोड़ों का मुनाफा कमाते हैं। इसके अलावा नववर्ष, हो या होली-दीवाली एस.एम.एस. करने के लिये होड़ सी लगी होती नये-नये संदेशों का इंतजार होता रहता है, और इसकी स्थिति इस कदर गंभीर हो जाती है कि नेटवर्क मिलना मुश्किल हो जाता है ।

मोबाइल के तो कहने ही क्‍या हैं यदि एक दिन भी आपका यह चहेता मोबाइल आप से दूर हो जाए तो आपको लगेगा, एक अधूरापन . . . जैसे आपकी कोई प्रिय चीज गुम जाती है . . .और यह मोबाइल आपको ना चाहते हुये भी इतना व्‍यस्‍त कर देता है कि आप कोई काम कर ही नहीं पाते, कई लोगों के लिये तो मोबाइल रखना सिरदर्द के समान है, यदि आफिस में समय अधिक हो गया तो पत्‍नी की रिंग आ जाती है . . . जैसे तैसे काम खतम करके घर पहुंचो तो खाने की टेबिल तक पहुंचते-पहुंचते बॉस की रिंग आ जाती है, ये काम रह गया था . . .सुबह थोड़ा जल्‍दी आ जाना . . . या फिर वक्‍त बेवक्‍त कोई सिरफिरा व्‍यक्ति जिससे आपकी दूर-दूर तक जान-पहचान नहीं होती उसका फोन आ जाएगा, ना पहचानने पर भी आपका वक्‍त खराब हो ही जाता है ऐसे समय में लगता है इससे बड़ी मुसीबत तो दूसरी कोई है ही नहीं . . . ।

किसी चीज के फायदे हैं तो नुकसान भी . . .पहले किसी को आना हो तो इंतजार रहता था कि कब पहुंचेंगे कोई निश्चित समय नहीं होता था, और ज्‍यादातर वक्‍त इंतजार में ही बीत जाता था, लेकिन अब तो इस सुविधा के चलते तुरन्‍त फोन करो और पता करो की आने में कितना समय है . . . उसी हिसाब से आगे का काम होगा . . . मोबाइल तो वर्तमान समय में हमारे लिये सर्वोपरि बन चुका है आखिर हो भी क्‍यों कर न संगीत का आनन्‍द भी, इंटरनेट के साथ साथ एक से बढ़कर एक गेम भी मिलेंगे आपको, और अपनों का सानिध्‍य भी . . .

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही अच्छी जानकारी, मुबारक लिखने लिए और ज्ञान बढ़ाने के लिए

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  2. अरे, अब क्या टिप्पणी दूं, मेरे मोबाइल पे बीबी की कॉल आ रही है।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

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  3. मोबाइल के बिना अब काम नहीं चलता ..........सही है ये बात

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